8 अगस्त 2019 - 13:33
इस एक पतले से जलमार्ग के लिए 400 साल से युद्ध!

दुनिया के सब से अधिक महत्वपूर्ण और युद्धों से भरे जलमार्ग के बारे में अत्यन्त रोचक तथ्य!

जब तक ईरान में तोप और तोप के गोले नहीं आए थे तब तक किसी को " हुरमुज़ स्ट्रेट" के बारे में कुछ पता नहीं था बल्कि उसका नाम भी किसी को नहीं मालूम था। स्थानीय लोग उसे " हूरमूग़" कहते थे। स्थानीय भाषा में " हूर" उस स्थान को कहा जाता है जहां खजूर के ढेर सारे पेड़ हों। जब ईरान में तोप आ गयी और दूर तक निशाना बनाने की क्षमता आय गयी तो अचानक ही " हुरमुज़ स्ट्रेट" का महत्व बढ़ गया, यह ऐसा संकरा रास्ता बन गया जहां पहुंच कर जहाज़ फंस जाते क्योंकि वह तट पर लगी तोपों के निशाने पर होते थे। ईरानी शासक शाह अब्बास ने इसी जलमार्ग पर पुर्तगालियों का गला दबोच लिया और हमेशा के लिए उन्हें फार्स की खाड़ी से निकाल बाहर किया। यह विजय इस बात का कारण बनी कि हुरमुज़ स्ट्रेट के उत्तर में मौजूद " गंबरून बंदरगाह " का नाम, " बंदरअब्बास" पड़ गया, फार्सी में बंदरगाह को, " बंदर" कहा जाता है।

     इससे पहले तक लगभग सौ वर्षों से अधिक समय से हुरमुज़ स्ट्रेट के आस पास के द्वीपों पर पुर्तगाल का क़ब्ज़ा था, पहली बार पुर्तगाल की नौसेना ने कैप्टन एलफांसो एल्बोक्रोक के नेतृत्व में सन 1506 में हुरमुज़ स्ट्रेप पर क़ब्ज़ा किया था। उसके बाद हुरमुज़ स्ट्रेट और उसके आस पास के द्वीप " अफशारी" " ज़न्दी" और " काजारी" शासकों तथा स्पेनिश, ब्रिटिश, डच और फ्रेंच सैनिकों के मध्य विवाद स्थल रहे हैं। एक सदी से इस जलमार्ग पर क़ब्ज़े का युद्ध तो समाप्त हो गया है लेकिन हुरमुज़ स्ट्रेट को लेकर विवाद अब भी जारी है, वजह, तेल का निर्यात और विश्व की अर्थ व्यवस्था।

 

प्राचीन नक़्शों में जलमार्ग बारीक नहीं !

हुरमुज़ स्ट्रेट में ईरानी द्वीप, हुरमुज़, क़िश्म, लार्क और हेन्गाम के अलावा ढेरो अन्य द्वीप हैं जो इस जलमार्ग पर ईरान के अधिकार को पुख्ता करते हैं। यह जलमार्ग, वास्तव में एक 158 किलोमीटर का रास्ता है जिसके सब से संकरे भाग की चौड़ाई 40 किलोमीटर है जिसका आधा हिस्सा, ईरान की जल सीमा के भीतर है और आधा अन्य जलमार्ग की दूसरी तरफ स्त ओमान का है। प्राचीन काल में जहाज़ों के गुज़रते समय यह जलमार्ग बिल्कुल संकरा नज़र नहीं आता था इसी लिए अधिकांश पुराने मानचित्रों में हुरमुज़ स्ट्रेट को चौड़ा दिखाया गया है लेकिन जब अधिक बारीकी से नक़्शे बनाए जाने लगे तब जाकर पता चला कि हुरमुज़ स्ट्रेट कितना सकरा है और जहाज़ों को इस मार्ग से गुज़रते समय कितना ध्यान रखना चाहिए वर्ना दुर्घटना हो सकती है।

तेल निर्यात की वजह से हुरमुज़ स्ट्रेट दुनिया का दूसरा सब से अधिक भीड़ भाड़ वाला जलमार्ग है। प्रतिदिन लगभग 14 मिलयन बैरल तेल और लगभग 4 मिलयन बैरल तेल संबंधी अन्य उत्पादन इसी मार्ग से गुज़रता है जबकि फार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों के आयात का लगभग आधा सामान इसी रास्ते से गुज़रता है।

 

दूसरे विश्व युद्ध में हुरमुज़ स्ट्रेट पर ब्रिटेन का क़ब्ज़ा

ईरान के काजार शासन के अधिकांश समय में हुरमुज़ स्ट्रेट और उसके द्वीपों पर ब्रिटेन का अधिकार रहा और समुद्र में उनका युद्धपोत हमेशा तैनात रहता जबकि तट पर उनके सैनिक भी मौजूद रहते। प्रथम विश्व युद्ध में बड़ी शक्तियों की लड़ाई में ईरान के भी कई छोटे बड़े जहाज़ तबाह कर दिये गये। दूसरे विश्व युद्ध में भी हुरमुज़ स्ट्रेट पर अग्रेज़ों का क़ब्ज़ा था और अन्ततः उन्होंने बहरैन को ईरान से अलग कर दिया। जब ईरान के पहलवी शासक  ने बहरैन को अलग करना स्वीकार किया तो उस समय बहरैन पर ब्रिटेन का अधिकार था। पहली शासन के दौरान, हुरमुज़ स्ट्रेट पर ईरानियों से अधिक समय, विदेशियों का क़ब्ज़ा था जिनमें अमरीकी और ब्रिटिश सब से आगे थे।

 

तेल टैंकरों का युद्ध

ईरान पर इराक़ के हमले के दौरान हुरमुज़ स्ट्रेट नामक इस जलमार्ग में सब से अधिक आग लगी। यह जलमार्ग ईरान और इराक़ के तेल वाहक जहाज़ों के गुज़रने का रास्ता था इस लिए यह रणक्षेत्र बन गया। ईरान युद्ध के दौरान, इस जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों की तलाशी के अपने अधिकार को इस्तेमाल करता था जिसके जवाब में इराक़ कभी कभी हुरमुज़ स्ट्रेट में युद्ध की आग भड़का देता था जिससे तेल की क़ीमत आसमान छूने लगती थी। इराक़, ईरान के तेल के निर्यात को रोकने में कामयाब नहीं हो पाया हालांकि इस युद्ध में अमरीका ने उसका पूरा साथ भी दिया था यही वजह थी कि ईरान ने सन 1975 से सन 1978 तक इराक़ और अमरीका से हुरमुज़ स्ट्रेट में एक साथ लोहा लिया जिसे " आयल टैंकर वॉर" का नाम दिया जाता है।

जब अमरीका की हुई फ़ज़ीहत!

सन 1986 में ईरान ने पहली बार अमरीका के एक मालवाहक जहाज़ को रोका और उसकी तलाशी ली। ईरान- इराक़ युद्ध के अंतिम वर्षों में हर साल 100 से 200 तक हमले फार्स की खाड़ी में होते थे और सब से अधिक नुक़सान ईरानी व इराक़ी जहाज़ों को नहीं बल्कि विदेशी जहाज़ों को पहुंचा था। सन 1987 में अमरीकियों ने कहा कि वह कुवैत के तेल वाहक जहाज़ों की रक्षा करेंगे लेकिन अमरीका के इस फैसले से उसकी बड़ी बेइज़्ज़ती हुई। बड़े दावे के साथ अमरीका ने कुवैती तेलवाहक जहाज़ का सुरक्षा का अभियान आरंभ किया और पहली बार में ही जब ब्रिजटोन नामक एक कुवैती तेलवाहक की पहरेदारी करते हुए अमरीकी युद्धपोत, हुरमुज़ स्ट्रेट से गुज़र रहा था तो अचानक ही कुवैती तेल वाहक जहाज़ समुद्र में बिछी एक बारुदी सुरंग से टकरा गया जिसके बाद बारुदी सुरंग के भय से अमरीकी युद्धपोत ने कुवैती तेल वाहक जहाज़ के पीछे छिप कर यह पूरा रास्ता पार किया  जिसका पूरी दुनिया के संचार माध्यमों में खूब मज़ाक उड़ाया गया। यह ईरान की एक बहुत बड़ी कामयाबी थी।

 

अमरीका की एक और नाकामी!

 फार्स की खाड़ी और हुरमुज़ स्ट्रेल में तेलवाहकों के युद्ध में ईरान, इराक़ और अन्य देशों के आयल टैकरों को बहुत नुक़सान हुआ फिर यह युद्ध समाप्त हो गया लेकिन हुरमुज़ स्ट्रेल में तनाव जारी रहा। यहां तक कि हालिया दौर आया और अमरीका ने फिर हंगामा मचाना आरंभ कर दिया। गत अप्रैल के महीने में बड़े बड़े दावों के साथ अमरीका ने घोषणा की कि अब्राहम लिंकन विमानवाहक युद्धपोत वह फार्स की खाड़ी में भेज रहा है। इस एलान के साथ ही पूरी दुनिया में धमाका हो गया, बहुत से लोगों ने कहा कि बस अब यह युद्ध का आरंभ है। अब ईरान क्या करेगा? ईरान ने कुछ नहीं क्या, हुरमुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों की तलाशी लेता है। तो अब्राहम लिंकन विमान वाहक युद्धपोत का क्या हुआ? कुछ नहीं! 3 जून को अमरीका का यह विमानवाहक युद्धपोत, ओमान सागर में पहुंचा और फिर उसने एलान किया कि वह हुरमुज़ स्ट्रेट से नहीं गुज़रेगा और फार्स की खाड़ी में नहीं जाएगा।!

इसके बाद ईरान ने हुरमुज़ स्ट्रेट की वायु सीमा में अमरीका के अत्याधुनिक ड्रोन विमान ग्लोबल हॉक  को मार गिराया, अमरीका खूब गर्जा लेकिन बरसा नहीं और अब तो जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। ईरान ने फिर अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन न करने की वजह से ब्रिटिश आयल टैंकर को रोक लिया इस बार अग्रेंज़ों की खूब हंगामा मचाया और धमकियां दी लेकिन वह भी कुछ नहीं कर पाए और फिर पता चला कि वह कुछ करना भी नहीं चाहते थे।

अब यह स्पष्ट हो चुका है कि पुराने लोग सही कहते थे कि हुरमुज़ द्वीप, हुरमुज़ स्ट्रेट की चाबी है और हुरमुज़ स्ट्रेट, दुनिया की अर्थ व्यवस्था की कुंजी है। ईरान, हुरमुज़ स्ट्रेट पर गर्व से सिर उठाए खड़ा है अगर किसी ने गलती की तो उसका गला दबोच लेगा। आजकल हुरमुज़ स्ट्रेट बहुत से ईरानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र है क्योंकि वहां से ईरान की शक्ति का संदेश पूरी दुनिया में फैल रहा है।